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Bihar News: मुजफ्फरपुर में जर्जर सड़क पर फूटा लोगों का गुस्सा, बेला मोड़ के पास पूसा मार्ग जाम

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मुजफ्फरपुर के बेला मोड़ के पास जर्जर सड़क से नाराज ग्रामीणों ने पूसा मार्ग जाम कर प्रदर्शन किया। सड़क निर्माण की मांग को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।

MUZAFFARPUR/आलम की खबर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सड़क निर्माण और खराब बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों का गुस्सा एक बार फिर खुलकर सामने आया है। बेला थाना क्षेत्र के बेला मोड़ के पास वर्षों से जर्जर पड़ी सड़क की मरम्मत और निर्माण की मांग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए पूसा मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से इलाके में यातायात व्यवस्था चरमरा गई और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। घंटों तक लोग जाम में फंसे रहे और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बेला मोड़ से गुजरने वाली यह सड़क लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और टूटी सतह के कारण रोजाना लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब सड़क पर जलजमाव हो जाता है और वाहन चलाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला, जमीन पर कोई काम शुरू नहीं हुआ।

इसी नाराजगी के कारण सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए। लोगों ने बेला मोड़ के पास पूसा मार्ग पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और सड़क निर्माण की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा भी शामिल रहे। लोगों ने “सड़क बनाओ”, “जनता को राहत दो” और “अब नहीं तो कभी नहीं” जैसे नारे लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।

जाम लगने के बाद पूसा मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सड़क के दोनों ओर बसों, ट्रकों, एंबुलेंस और निजी वाहनों की लंबी लाइन लग गई। कई यात्रियों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने मजबूरी में पैदल ही अपना सफर तय किया। स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों का भी कारोबार प्रभावित हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। बाइक सवार और छोटे वाहन चालक अक्सर गड्ढों में गिरकर घायल हो जाते हैं। रात के समय सड़क की स्थिति और खतरनाक हो जाती है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल निरीक्षण और कागजी प्रक्रिया तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।

प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी गर्म रहा। कई ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि चुनाव के समय सड़क निर्माण और विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता की समस्याएं भुला दी जाती हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण हो जाता तो उन्हें सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती।

जाम और प्रदर्शन की सूचना मिलते ही बेला थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और जाम हटवाने का प्रयास किया। काफी देर तक प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत चलती रही। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सड़क निर्माण से संबंधित समस्या को उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा और जल्द समाधान निकालने की कोशिश होगी।

हालांकि शुरुआत में ग्रामीण प्रशासन की बात मानने को तैयार नहीं थे। प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे और स्पष्ट कहा कि जब तक सड़क निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

काफी देर की बातचीत और समझाने-बुझाने के बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य करने की कोशिश शुरू हुई। प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील की ताकि फंसे हुए वाहन आगे बढ़ सकें। इसके बाद कुछ देर में आंशिक रूप से यातायात बहाल किया गया, लेकिन लंबे जाम के कारण देर तक सड़क पर दबाव बना रहा।

यह पहला मौका नहीं है जब बिहार में खराब सड़क को लेकर लोगों का आक्रोश सामने आया हो। राज्य के कई जिलों में समय-समय पर सड़क निर्माण, जलजमाव और खराब बुनियादी ढांचे को लेकर प्रदर्शन होते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क किसी भी क्षेत्र की जीवनरेखा होती है। यदि सड़कें जर्जर हों तो न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार पर भी सीधा असर पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बेला मोड़ और पूसा मार्ग इलाके की महत्वपूर्ण सड़क है, जिससे रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है। इसके बावजूद सड़क की हालत वर्षों से खराब बनी हुई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

फिलहाल प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लोगों का गुस्सा साफ संकेत दे रहा है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर काम देखना चाहते हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं, इस पर लोगों की नजर बनी रहेगी।

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